true love story part 9
आॅख पीली ,बाथरूम पीली मैने कहा बेटा निकल ले यहां से नही तो उपर जाने कि व्यवस्था हो जायेगी। मैं ने रात में ही बैग लगाया और निकल लिया घर आया पापा बोले ये क्या है, अन्दर से बहुत कमजोरी आ गयी थी, थक जाता था तुरन्त ही फिर अगले दिन डाॅक्टर के पास गया उसने बोला अभी तक कहां रहे मैने कहा क्यों बोले पीलिया हो गया तुम्हे और बहुत हाई लेबल कि मैने कहा लो मुझे पीलिया कि चिन्ता कम उसकी चिन्ता ज्यादा मैने डाॅक्टर साहब से पूछा सर कब तक ठीह का जाउगां वो गुस्सा पडे बोले दो महीने मै घबरा गया लो मर गया अब क्या होगा बोल कर भी नही आया ऐसा मै सोच रहा था और दोस्तो से कोई उम्मीद ही नही थी क्योकि वे हमेषा उल्टा सोचते रहे। मै रोज पूछता था उन लोगो से आज दिखी थी क्या दोस्त भी बोल देते थे हाॅ आयी थी बाहर तुम्हे आवाज लगा रही थी, मजाक में फिर मै षिरियस होकर पूछता था वो कहते थे हाॅ सामने एक लडका रहता है। उसे देख कर इषारा कर सही थी। ऐसे ही मैने आठ-दस बार पूछा यही उल्टे सीधे जबाब मिले फिर मै डेढ महीने बाद ठीक हो गया । अब इलाहाबाद फिर आया और वही गली से आया उसे देखते हुए वो किस्मत से वो अपनी बाल्कनी में दिख गयी , मै मुस्कुराया और रूम चला आया।
फिर अगले दिन मै उससे मिला वो देखकर मुझे रोने लगी मैने मन में कहा अभी-अभी ठीक होकर आया फिर वही ड्रामा होने लगा मैने उसे रोका और पूछा क्या दिक्कत है, पागल हो क्या पता नही वो बस भाग गयी बगैर कुछ बोले अपने घर मै पागलो कि तरह खडा रोड पर और जाकर अपने घर वालों को जाने क्या बात करने लगी। मैने सोचा मेरे बारे में कुछ बता रही जाने क्या मै अपने दोस्त के यहां रूका फिर उस दिन पता नही उसके घर वाले भी मुझे देखते थे घूर-घूर कर और वो बस जाये दिन भर घर में ही रहे न बाहर निकले और घर कि सारी लाइट बन्द कर दे और पागल कि तरह हरकते करने लगी पहले जब बाहर निकलती थी तो हाय फिलाइगं किस और इषारे से बात भी करती थी अचानक सब बन्द मैने सोचा इतने दिन मै दिखा नही इसकी ये बजह तो नहीं मैने एक लैटर लिखा और उससे देने के लिये सोचा क्योकि अब मुझे उतना ही समय मिलता था उसे देखने के लिये जब वो अपने काॅलेज से आती थी। मैने उसे रास्ते पर फिर रोका बात करना चाहा वो रूकी और रोने लगी बोली अब तुम चले जाओ मेरे सामने से और रोते हुए गुस्से में चली गयी




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