true love story part 6
मैं पडा रहता था और बस पढाई और कुछ नहीं लडकियो से दूर भागने लगा था फिर एक साल बाद फिर से जीवन में वही दौर आया न चाहकर भी फिर कूद पडा आषिकी में पता था फिर भी ये जिददी दिल ले गया मुझे उसी पुराने दौर में
एक लडकी मिली जो इलाहाबाद से ही थी। वैसे तो कहू लडकियां बहुत मिली सब फ्रेडस तक थी , लेकिन ये दो लोग मेरे जीवन में खाष थी। मैं बडी मुषक्लि से उभर पाया था कि फिर एक नया सियापा खडा हो गया और मेरे दिल दिमाग में घर कर गया। मैने अपने आप को बहुत सम्भाला कि एक से सही से निभा नही पाया अब फिर वही लेकिन जब वो सामने आती थी। तो मैं पुराना गम भूल जाता था फिर से जीने को चाहता था,उसी दौर में लेकिन जैसे ही वो जाये मेरा मन विचलित हो जाता था मन कहता था तैयारी पर ध्यान दो दिल कहता था आषिकि करो साला इसी में मेरी फटी पडी थी करूं तो करूं क्या जब वो दिखे उसे देखू थेाडी देर बाद अपने को ही डंाटू कि क्या कर रहा ये करने आया है वो रोज उसी समय निकले जिस समय मैं कोचिंग जाने का समय हो उसी समय षाम छत पर आये जिस समय मेरा जाना होता था। अब से किस्मत समझो या बेवकूफी फिर जब ये सब हद पार कर गया तो मैने उसे एक दिन इषारा कर दिया और नीचे आने को कहा क्या करता पढने में मन ही नहीं लग रहा था कन्सनट्रेट नहीं कर पा रहा था वही दिखने लगी थी। जब वो नीचे आयी तकरिवन षाम के 6ः30 पर मुझे समय भी याद है, वह बहुत खूबसूरत थी मन कल्पना करने लगा और मुझे उलझाने लगा वो वोली हाय मैने भी बोला मैने कहा यार मैं बहुत परेषान हो गया बोली क्यूं मैने कहा तुम्हारा चेहरा और तुम हर जगह दिखने लगे मुझे और आज तो हद हो गयी...............



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