true love story part 5


और मेरी उससे फिर बात होती रही काफी दिनो तक मुझे भी ग्रेजुएषन के बाद क्या करना है सोचना था काफी सोचने के बाद मैने फैसला लिया कि अब डिग्रियां लेना बन्द काॅम्पिटेटिव एग्जाम कि तैयारी षुरू करूगां मैं इलाहाबाद जाउगां तैयारी करने उसको भी मैने बोल दिया वह बोली अगर तुम पोस्ट ग्रेजुएषन करो यहां से तो मै भी एडमिषन ले लूॅ यही पर लेकिन मेरा मन बन चुका था मैने तारीख पता कि कोचिंग षुरू होने कि तारीख पता कि तो तारीख नजदीक थी मैने उसे बताया कि मै जा रहा इलाहाबाद उसने कहा एक बार मिल लो मुझे भी मिलने का मन था उससे लेकिन जिस दिन मिलना था उसी दिन सुबह भईया कानपुर खीच ले गये और वो तैयार थी गुस्सा हो गयी गुस्सा होना भी जायज था पर ज्यादा देर नहीं वह मान गयी दोस्तो अफसोस इस बात का था इसी तरह तीन बार हुआ तीनो बार नही मिल पाया पता नही क्या हो जाता था पता नहीं लेकिन वो हर बार माफ कर देती थी फिर इलाहाबाद जाने का समय आ गया मै इलाहाबाद आ गया काफी दिनो तक बाते चलती रही बहुत प्यारी प्यारी बाते हुई बहुत सारी मुझे उसका जन्मदिन पता था लेकिन किसी भी जन्म दिन पर मिलने नही गया ,लेकिन उसका हपजि लेता रहा कि जब मिलूंगा दे दूगां फिर एक बार मै घर गया । तब वह बी0टी0सी0 टीचर ट्रेनिगं कर रही थी मै उससे मिला लेकिन बुद्वू सा मन साला उसके लिये कुछ लेकर नही गया मै बहुत एक्स टाइटिड था ।


आती हो तो वारिष लेती आना जी
भर कर के रोने का दिल करता है
रहती है ये ख्वाहिष होठो पर भी
जब भी ये दिल मेरा जो भरता है। 


रोज लेकर गया था, और उसके हपजि मै इलाहाबाद में ही छोड आया था, कुछ देर बाते हुयी उसने फिर अपने घर फोन किया और कुछ पल बाद उसके घर से कोई उसे लेने आ गया फिर मै उसे गले नहीं लगा सका थैक्यू तक नही बोल पाया हर बार मेरी गलतियो को नजर अंदाज करने के लिये इसके बाद मै फिर उससे कभी मिल नही सका समय का ऐसा मोड आया हम दूर होते चले गये जो बाते दिन भर होती थी वो बाते घण्टो में बदल गयी, कुछ दिन बाद मिनटो में बदल गयी और कुछ दिन बाद सेकेण्डो ंमें और कुछ समय बाद वाटस एप्प से बात होने लगी और अब सालों में बात होती है। ऐसी बात नही कि मै उसके इमोसन को समझ नहीं पर रहा था पर पता नही मै आज तक समझ नही पाया कौन सी चीज थी जिसकी बजह से मै उससे मिल नही पाता था, जब मिलने कि सोचो कही न कही ऐसी समस्या आ जाती थी,जिससे मैं भाग नही सकता था जबकि बहुत प्यार था,इमोसन थे,साला प्यार भी अजीब चीज है। पता नही चलता बड रहा है,या खत्म हो रहा है। 

वक्त कि थी हमसे कुछ नाराजगी
कह न सके हम वो बाते आज भी 
जिनको लिये हम तुम हो गये जुदा
फिर भी वो लम्हें तुम लेते आना
आधे-अधूरे से जो छूटे थे।




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