true love story part 2


तोसे नैना लागे ,पिया संावरे । 
तोसे नैना लागे ,पिया संावरे ।।
नहीं बस में अब ये जिया सावरें,।
मोहब्बत तो इक जावेदां जिंदगी है।।


मैं पेपर देकर आ रहा था घर जैसे ही काॅलेज के बाहर आया उसने पीछे से आवाज दी और मैं रूक गया और मेरे दिल कि धडकन तेज चल रही थी,या धीमी मैं अनुमान नहीं लगा पा रहा था, मुझे याद है जब मैने उससे अपने मन कि बात बोली तब उसने बोला इतने दिन बाद क्यों बोला अचानक क्यों ?????


समां को पिघलने का अरमान क्यूॅ हैं।
पतंगो केा जलने का अरमान क्यूॅ है।।
इसी षौक का इम्तिहां जिदंगी है।




जब आखिरी समय बचा काॅलेज का फिर मैं काफी दिनों तक ये सोचता रहा कि यही से पोस्ट ग्रेजुएशन कर लूॅ समय मिल जायेगा आगे ,हां तो उसने मुझे आवाज दी कि कहां घर जा रहे हो मैने कहां हंा मै बाइक से जाता था उसका पेपर था उर्दू का सेन्टर वही गया था जहां का मैं था तो मैने कहा इससे अच्छी बात करने के लिये और कोई समय ठीक नही मै अन्दर ही अन्दर खुष हो गया किन्तु उसके साथ उसकी एक फे्रंड भी आयी अब दो लोग हो गये फिर मैं जाना हुआ वहां से और काॅलेज से 20 किमी0 दूर ही सेण्टर था। पेपर का उसका उस बीच मैने जो बातचीत कि शायद वो मुलाकात ही आखिरी थी।
हम खुल कर बात नहीं कर पाये उससे उसे समय उसकी जो फ्रेंड थी वो भी मेरे ही क्लास कि थी । जब मै उन दोनो को बाइक पर ले जा रहा था तब मै बहुत अच्छा अनुभव कर रहा था। ( मैं बहुत खुश था पहली बात किसी लडकी ने कंधे पर हाथ रखा था गाडी तेज चलाने पर वो भी खुश थी शायद ) 
आगे हमारे भाई के दोस्त मिल गये काॅलेज से पांच किमी0 पहले मैने समझ नहीं पाया वो हैलमेट लगाये थे, फिर गाडी नम्बर देखा और उन्होने हैलमेट हटाया मैं चैहोक गया फिर उन्होने इनजोआये बोलते हुए आगे निकल गये।
मैने उन दोनो को सुरक्षित पेपर सेन्टर पर छोडा और मैने पूछा कितने बजे पेपर छूटेगा उसने कहा पांच बजे मेरे दिमाग में पांच बजे का टाइम एकदम फीड हो गया घर गया हर जगह बस पांच बजे ही दिख रहा था मोबाइल अलार्म पांच बजे सबसे बोल दिया गाडी कोई मत छूूना जाना है। पांच बजे और जैसे ही पांच बजे मै निकला सीधे पेपर सेण्टर पहुचा वहां भीड-भाड थी मोबाइल तो उसके पास था नहीं पूछता कहां हो मैं बस उसी को देख रहा उसी लडकियां निकल रही मैं बस उसी को देख रहा उसी काॅलेज के बाहर जितनी भी दुकाने , टीचर थे सब मुझे जानते थे पूछ रहे और बेटा कैसे आना हुआ मै किसी कि नहीं सुन रहा मन ही मन बोल रहा भाड में जाओ और धीरे -धीरे सब निकल गये वो नहीं दिखी अब भाई मैं परेशान गाडी ,दिल दिमाग परेशान गाडी आगे पीछे करते - करते घुस गया काॅलेज के अन्दर वहां कोई नहीं मैने तुरन्त गाडी मोडी और रोड पर आ गया वहां चल रही थी पुलिस..........continue reading page 2

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