रिश्ते relation

                                                 रिश्ते



दोस्तो रिश्ते दो प्रकार के होते हैं,पहला जो हमे जन्मजात मिलते हैं दूसरे वो जो हमें अपने मार्ग में मिलते है अपने व्यवहार कौशल से मिलते हैं।

लेकिन ये दुख कि बात है कि आज हम अपने जन्मजात मिले रिश्तों से बहुत दूर होते चले जा रहे हैं कोई रोजी रोटी के चक्कर में भाग रहा कोई किसी और के चक्कर में क्यों ???

इसका कारण यह है कि हमने अपने आप को कुछ भ्रम में रखा है कि हम फिर मिल लेगे कैसे मिलोगे भाई केवल यही जन्म है साथ रह लो या दूर रह लो हर मनुष्य को अपने माता-पिता ,भाई ,बहन सगे सम्बन्धी जो अति प्रिय होते हैं फिर भी आज हम थोडी ज्यादा तरक्की के चक्कर में सालो के साल बाहर दूर विता देते हैं और कुछ तो लोग लौट कर ही नहीं आते क्या ये तरक्की है मां- बाप सोचते हैं बेटा तरक्की करे। पता चला बेटा ने ऐसी तरक्की कि फिर कभी लौट कर ही नही आया उसने दुनिया दूसरी बना ली ये उस पर निर्भर करता है लेकिन एक बात हमेशा साद रखनी चाहिये कि जन्मजात रिश्ते बार-बार नहीं मिलते चाहे साथ रहकर बिता लो या झूठी तरक्की में बिता लो कुछ लोग समाज को तरक्की दिखाने के चक्कर में पूरी जिंदगी अपने घर से दूर रहते है और उनके घर वाले दिल पर पत्थर रखकर दुनिया से कहते रहते है मेरा बेटा ये मेरा ब्ेाटा वो समझ नही आ रहा ये सुखी है क्यों भाई हर मां-बाप का सपना होता है । बेटा तरक्की करें लेकिन ये सपना नहीं होता कि तरक्की के चककर में इतना दूर न जाये जिससे लौटना मुश्किल पड जाये। तो दोस्तो परिवार के साथ रहे अैार मौज करें।

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